पैसा कमाना है तो पहले ये सवाल खुद से पूछो | क्यों 90% टॉपर्स की जिंदगी में ‘सक्सेस’ नहीं आता |

Heading: कॉलेज ड्रॉप आउट होते हैं, वो रिस्क ज्यादा लेते हैं। क्षमता किसमें ज्यादा होती है?

दोस्तों, आज हम एक ऐसे विषय पर बात करेंगे जो शायद आपके दिमाग में हमेशा कौंधता रहता है। क्यों अक्सर कम पढ़े-लिखे लोग ज्यादा तरक्की कर जाते हैं? क्यों कॉलेज ड्रॉप आउट लोग दुनिया की सबसे बड़ी कंपनियां खड़ी कर देते हैं? और क्यों बहुत पढ़े-लिखे, डिग्रीधारी लोग अक्सर कॉम्प्लिकेशन में उलझकर रह जाते हैं?

इन सब सवालों का जवाब जानने के लिए हम लेकर आए हैं एक ऐसे शख्स को, जिन्होंने 10 लाख से ज्यादा लोगों को ट्रेंड किया है, लगभग 2500 कंपनियों को ऊपर पहुंचाने में मदद की है, और 16 कंपनियों के IPO लॉन्च करवा चुके हैं। ये हैं बसेश गाला जी। इन्हें तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम ने भी सम्मानित किया है। तो आइए, बिना देर किए शुरू करते हैं और जानते हैं बिजनेस, सक्सेस और एजुकेशन के असली मायने।


कम पढ़े-लिखे लोग ज्यादा सक्सेसफुल क्यों होते हैं?

यह सवाल बहुत लोगों के मन में आता है। बसेश गाला इसके पीछे तीन वैज्ञानिक कारण बताते हैं:

1. अर्ली सक्सेस का अहंकार:
स्कूल-कॉलेज में जो लोग टॉप करते हैं, उन्हें सक्सेस जल्दी मिल जाती है। लेकिन सक्सेस को झेलना हर किसी के बस की बात नहीं होती। जल्दी सक्सेस मिलने से अहंकार आ जाता है और फेलियर सहने की क्षमता खत्म हो जाती है। ऐसे लोग एडजस्ट नहीं कर पाते और फिर डिप्रेशन में चले जाते हैं। आपने देखा होगा, 90% स्कूल टॉपर्स आज स्ट्रगल कर रहे हैं – सिर्फ पैसों से नहीं, बल्कि फैमिली, हैप्पीनेस, हेल्थ और मेंटल हेल्थ में भी।

2. हाई आईक्यू और ईगो प्रॉब्लम:
जो लोग बहुत होशियार होते हैं, उनका आईक्यू तो हाई होता है, लेकिन ईक्यू (इमोशनल क्वोशिएंट) कम होता है। उनमें अहंकार आ जाता है – “ये गधा है, इसको क्या आता है? इससे काम नहीं करना, मैं खुद कर लूंगा।” खुद करने के चक्कर में वे कभी बिल्ड नहीं कर पाते। मोदी जी आज पीएम हैं क्योंकि उन्हें टीम बनाना आता है, उनका ईक्यू अच्छा है।

3. भूख और जज्बा:
जो स्कूल में स्ट्रगल करते हैं, उनके अंदर भूख होती है, जज्बा होता है। “स्टे हंग्री, स्टे फूलिश” वाली बात। जो कहता है, “मुझे कुछ नहीं आता, सीख लो, आप बोलो मैं फॉलो करूंगा” – वही आदमी आगे निकलता है। जितने भी बड़े नेता या एंटरप्रेन्योर देख लो, ज्यादातर कम एजुकेटेड मिलेंगे।

बसेश गाला का उदाहरण:
“मेरे सर्कल में जितने भी 1000 करोड़ प्लस के एंटरप्रेन्योर्स हैं, सब चौथी-पांचवीं-छठी फेल हैं। क्योंकि उन्होंने एक्सेप्ट किया कि मुझे नहीं आता। टेक तू ही मेरे को सेट कर दे, मैं तुझे फॉलो करता हूं। और उनके अंदर रिस्क टेकिंग एबिलिटी बहुत है। जो MBA किया है, उनकी रिस्क टेकिंग खत्म हो जाती है – उन्हें सैटरडे-संडे ऑफ चाहिए, मेंटल प्रेशर नहीं चाहिए।”

क्लासिक उदाहरण: एक जर्मन शेफर्ड डॉग जो घर में पलता है, रास्ते के कुत्ते से डर जाता है क्योंकि वो पैम्पर्ड है। जबकि रास्ते वाला कुत्ता रफ-टफ है, दो दिन भूखा रहा है, झगड़ा किया है। कम पढ़े-लिखे लोग वही रास्ते वाले कुत्ते हैं जिन्होंने स्ट्रगल किया है।

गाला साहब एक रियल उदाहरण देते हैं: “मेरी एक कंपनी है जिसका वैल्यूएशन बहुत अच्छा है। उनके को-फाउंडर टायर पंक्चर लगाते थे। आज 8000 करोड़ की कंपनी के मालिक हैं। क्यों? क्योंकि आज 55 साल की उम्र में भी अगर स्टोर पर कोई नाटक करता है, तो वो खुद ट्रक से बोरी लगा देते हैं। जब मालिक खुद बोरी उतरता है, तो सब सीधे हो जाते हैं।”


एजुकेशन सिस्टम: एक बड़ा स्कैम?

बसेश गाला मानते हैं कि मौजूदा एजुकेशन सिस्टम एक स्कैम है। ब्रिटिशर्स ने इसे लोगों को गुलाम बनाने के लिए बनाया था – खड़े रहो, गुड मॉर्निंग सर, टाइम टेबल, 40 मिनट का लेक्चर, होमवर्क। हमारे द्रोणाचार्य के सिस्टम को छोड़कर हमें टाइम-टेबल के गुलाम बना दिया गया।

आज एजुकेशन मनी-मेकिंग सिस्टम बन गया है। 10-20 लाख फीस, डोनेशन, और जो पढ़ाया जा रहा है और रियल लाइफ में जो हो रहा है, उसमें कोई कनेक्ट नहीं है। नतीजा? बड़े-बड़े स्कूलों में सुसाइड, डिप्रेशन।


कॉलेज ड्रॉप आउट का मिथक

लोग कहते हैं – मार्क जकरबर्ग कॉलेज ड्रॉप आउट थे, बिल गेट्स कॉलेज ड्रॉप आउट थे। लेकिन गाला साहब कहते हैं, उनकी औकात भी देखो। वो स्टैनफोर्ड, हार्वर्ड जैसे कॉलेजों में गए और वहां से ड्रॉप आउट हुए। उन्होंने पहले अपने को प्रूव किया। उनके सामने विजन था।

गाला साहब की सलाह: “पहले मुझे प्रूव करो कि तुम IIT या IIM में एडमिशन लेने की औकात रखते हो। फिर भले ड्रॉप आउट करो। तुम प्रूव करो कि कुछ बड़ा बना सकते हो, फिर ड्रॉप आउट करो। लेकिन ये मत सोचो कि मैं पढ़ूंगा नहीं और सीधा बिजनेसमैन बन जाऊंगा।”


जो पढ़े-लिखे हैं वो रिस्क क्यों नहीं ले पाते?

पढ़े-लिखे लोग कैलकुलेशन के चक्कर में रिस्क नहीं ले पाते। वो गूगल मैप देखते हैं, बारिश हो रही है तो निकलते नहीं। जिसके अंदर भूख है, वो कहता है – “चल गाड़ी निकालते हैं, स्लो चलाएंगे, पूछ लेंगे लोगों से।”

Kodak का उदाहरण: Kodak को किसने मारा? डिजिटल कैमरा ने। और डिजिटल कैमरा इन्वेंट किसने किया था? Kodak ने ही। लेकिन वो इतने कंफर्ट जोन में थे कि सोचा – अच्छा पैसा आ रहा है, क्यों रिस्क लें? बाद में लॉन्च करेंगे। तब तक कॉम्पिटीटर ने लॉन्च कर दिया। रिस्क टेकिंग एबिलिटी नहीं थी।

Apple का उदाहरण: Apple आज अपने iPhone को खुद मार रहा है। Apple AI डिवाइस ला रहा है जो गले में पहनना है और बात करेगा, कॉल करेगा। Apple कह रहा है – कोई लॉन्च करे उससे पहले मैं ही कर लूं, भले मेरा iPhone का सेल गिर जाए। और ये डिजाइन करने वाला आदमी कॉलेज ड्रॉप आउट है। क्यों? क्योंकि उसके अंदर रिस्क टेकिंग एबिलिटी है।


कैसे फाउंडर अपना बिजनेस खुद मार देता है?

गाला साहब इसे ब्रह्मा, विष्णु, महेश के सिद्धांत से समझाते हैं।

  • ब्रह्मा मोड (स्थापना): शुरुआत में फाउंडर को 18-20 घंटे काम करना पड़ता है, रिस्क लेना पड़ता है, सब कुछ देखना पड़ता है। ये ब्रह्मा मोड है।
  • विष्णु मोड (मैनेजमेंट): एक बार स्थापना हो गई, तो फिर सिस्टम चाहिए, डिसिप्लिन चाहिए। आपको ब्रह्मा मोड से विष्णु मोड में आना चाहिए। यानी डेलिगेशन, सिस्टम्स, टीम बनाना।
  • महेश मोड (विनाश): अगर विष्णु मोड नहीं आया, तो फिर शंकर मोड आ जाता है – विनाश।

परेशानी ये है कि फाउंडर ब्रह्मा मोड से निकलता ही नहीं। उसे लगता है – “अपुन भगवान है, मैं ही सब कुछ करेगा। मैं ही चेक लिखूंगा, मैं ही कस्टमर से बात करूंगा।” यहीं से बिजनेस मरना शुरू होता है।

टेस्ट: गाला साहब एक टेस्ट बताते हैं – अगर आपको किडनैप करके स्विट्जरलैंड ले जाया जाए और मोबाइल-इंटरनेट न हो, तो आपकी कंपनी का क्या होगा?

  • 90% लोग: कंपनी बंद, एक महीने में बंद
  • 9% लोग: कंपनी चलेगी लेकिन ग्रो नहीं होगी
  • 1% लोग: कंपनी ग्रो भी होगी (जिन्होंने सेकंड लाइन, थर्ड लाइन तैयार की है)

डेलिगेशन और शेयरिंग का महत्व

गाला साहब कहते हैं – जो आदमी बांटना नहीं जानता, वो बड़ा नहीं बन सकता। “मैं 1 किलो का केक अकेला खाऊं या 100 किलो का केक बनाऊं, आधा औरों में बांटूं और आधा खाऊं? 50 किलो तो मिल रहा है।”

दीपेंद्र गोयल (Zomato) का उदाहरण: उन्होंने सही समय पर IPO लाया, सही समय पर Blinkit खरीदा, और फिर खुद CEO पद से रिजाइन कर दिया। क्यों? क्योंकि उन्होंने अपनी स्किल को पहचाना। ब्रह्मा, विष्णु, महेश – तीनों की स्किल अलग है। फाउंडर का काम स्थापना करना है। मैनेजमेंट के लिए दूसरों को लाना पड़ता है।

रतन टाटा का माइंडसेट: जब उनसे पूछा गया कि इतनी संपत्ति होते हुए भी Nano में क्यों घूमते हैं? उन्होंने कहा – “ये पैसा मेरा थोड़ी है। ये कंपनी का पैसा है, ट्रस्ट का पैसा है। मैं ट्रस्टी हूं, मुझे औरों का भला करना है।” यही माइंडसेट है।


कैसे पता करें कि बिजनेस करना चाहिए या नौकरी?

गाला साहब की सलाह:

  1. पहले नौकरी करो: जब तक आपके पास कोई डिसरप्टिव स्टार्टअप आइडिया न हो (जैसे AI प्रोडक्ट), पहले 1-2 साल नौकरी करो। नौकरी से दो चीजें पता चलती हैं – आपकी एबिलिटी पता चलती है, और सेविंग हो जाती है।
  2. पार्ट टाइम शुरू करो: रात को 2 घंटे निकालो, जो पसंद है वो पार्ट टाइम बिजनेस शुरू करो – वेबसाइट बनाना, टेलीकॉलिंग, क्रिएटिव, AI। या किसी दोस्त की दुकान पर सैटरडे-संडे खड़े हो जाओ।
  3. खुद को जज करो: तीन चीजें देखो – हौसला (हार न मानना), कम्युनिकेशन स्किल (लोग समझें और एक्सेप्ट करें), टीम प्लेयर (लोग आपके आशिक बनें)।

बिजनेस के बारे में सबसे बड़ी गलतफहमी

आजकल वैल्यूएशन को ही बिजनेस समझ लिया जाता है। शार्क टैंक में देखकर लोग सोचते हैं – मैं आईडिया बोल दूंगा, 10 करोड़ फंडिंग मिल जाएगी, 50 लाख सैलरी लूंगा। लेकिन बिजनेस वैल्यूएशन नहीं है। बिजनेस है प्रॉफिट और कैश फ्लो।

आज फंडिंग लेना इतना आसान नहीं है। जो फंड्स देते हैं, वो गन्ने की तरह निचोड़ते हैं। गाला साहब एक उदाहरण देते हैं: एक इन्वेस्टर ने 10 करोड़ देने की बात कही, लेकिन ₹1 करोड़ देकर बोला – अगले ₹1 करोड़ टर्नओवर के बाद अगली किश्त, और अगर नहीं हुआ तो 24% इंटरेस्ट के साथ पैसे वापस करने पड़ेंगे।


कैसे चुनें सही मेंटर?

आजकल मार्केट में ऐसे लोगों की कमी नहीं जो बोलना अच्छा जानते हैं लेकिन खुद कुछ नहीं बनाया। गाला साहब तीन सवाल पूछते हैं:

  1. खुद कितना फिट है? (हेल्थ का गुरु है तो खुद कितना फिट है? बिजनेस का गुरु है तो खुद का बिजनेस क्या है?)
  2. व्यवहार चेक करो: इसके पुराने एंप्लॉई क्या बोलते हैं? वेंडर्स क्या बोलते हैं? कस्टमर्स क्या बोलते हैं? 3 पुराने एंप्लॉई, 3 वेंडर्स, 10 कस्टमर्स से बात करो।
  3. शादी वाला फॉर्मूला: 2-3 दिन के प्रोग्राम में जाओ, सीखो। लेकिन एक महीने से ज्यादा का प्रोग्राम उसी से करना जैसे शादी करनी है। वरना शकुनी जैसा मेंटर मिला तो सत्यानाश।

शुरुआत कैसे करें?

गाला साहब सर्विस बिजनेस से शुरुआत करने की सलाह देते हैं। सर्विस बिजनेस सबसे आसान है – सिर्फ मोबाइल, कंप्यूटर, इंटरनेट चाहिए। डिजिटल मार्केटिंग, AI कंसल्टेंसी, सॉफ्टवेयर सर्विस – कुछ भी।

सेल्स करना सीखो: “अगर मेरा मोबाइल छीन लो, पैसा जीरो कर दो और अफ्रीका में छोड़ दो, तो भी मैं करोड़पति बनके दिखाऊंगा। क्योंकि मुझे सेल्स करना आता है। एथिकल सेल्स – रिलेशनशिप बनाकर, वैल्यू क्रिएट करके। गंजे को कंघी बेचना फ्रॉड है, सेल्स नहीं। गंजे को ऑयल बेचना जिससे नींद आए या हेयर के चांस बढ़ें, वो सेल्स है।”

अगर आप सेल्स कर सकते हो, तो कोई भी धंधा कर सकते हो।


तीन चीजें जो हर बिजनेसमैन को आनी चाहिए

गाला साहब के मुताबिक, ये तीन चीजें अगर संभाल लीं तो कभी डूबोगे नहीं:

  1. फाइनेंस और कैश फ्लो: कितना खर्चा है? कितनी EMI है? इन्वेंटरी में कितना है? कितना उधारी है? टर्नओवर कैसे बढ़ाना है? ये हर किसी को आना चाहिए।
  2. सेल्स करना: अगर आप बेच नहीं सकते, तो टीम को टारगेट नहीं दे सकते।
  3. पार्टनर्स बनाना: टीम नहीं, पार्टनर्स बनाओ। वेंडर नहीं, पार्टनर्स बनाओ। जिसके पास मल्टीपल पार्टनर्स है, वो सक्सेसफुल है।

सर्विस बिजनेस बनाम प्रोडक्ट बिजनेस

लोग सोचते हैं सर्विस बिजनेस में पैसा नहीं है, प्रोडक्ट में है। लेकिन सर्विस बिजनेस शुरू करना सबसे आसान है। घर में लैपटॉप के साथ सर्विस बिजनेस शुरू करो। वहां कॉन्फिडेंस बनाओ, सेविंग्स करो। फिर प्रोडक्ट में जाओ।

उदाहरण: एक डॉक्टर है। वो घर बैठे सर्विस देता है। Instagram पर ज्ञान देता है। फॉलोअर्स बढ़े। फिर किसी इन्वेस्टर के पास जाकर कहता है – मेरे पास अच्छा प्रोडक्ट है, मैंने घर पर ट्राई किया है, फंडिंग दो। तब फंडिंग मिलेगी, प्रोडक्ट बनेगा, ब्रांड बनेगा।


निष्कर्ष

बसेश गाला का मैसेज साफ है – बिजनेस करना बहुत मुश्किल काम है। कम से कम 3 साल रोज मरना पड़ता है, थप्पड़ खाने पड़ते हैं, गाली खानी पड़ती है। लेकिन अगर आपके अंदर भूख है, जिज्ञासा है, और आप बांटना जानते हैं, तो आप सक्सेसफुल हो सकते हैं।

तीन मंत्र:

  1. पहले स्किल प्रूव करो, फिर फंडिंग उठाओ।
  2. सर्विस बिजनेस से शुरू करो, कॉन्फिडेंस बनाओ।
  3. डेलिगेट करना सीखो और बांटना सीखो।

अगर यह पॉडकास्ट आपको पसंद आया और आप और गहराई से सीखना चाहते हैं, तो कमेंट करके बताएं। हम बसेश गाला सर के साथ 7 दिन की सीरीज ला सकते हैं। आपके कमेंट ही तय करेंगे कि हम आगे क्या करें।

सीखते रहो, ग्रो करते रहो।

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