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अपने Business के लिए Capital Raise मत करो | Startup Ecosystem की सच्चाई
पूरी दुनिया बस एक ही चीज़ के बारे में बात कर रही है — Indian Startup Ecosystem। लेकिन इस ecosystem के अंदर हो क्या रहा है, किसी को नहीं पता। आज हम बात करेंगे उन सच्चाइयों की जो कोई आपको नहीं बताता।
VC से पैसा लेने से पहले यह ज़रूर जानें
Term Sheet कोई guarantee नहीं है
भारत में यह बहुत आम हो गया है कि VC एक term sheet sign करता है, फाउंडर को 4 महीने wait कराता है — और फिर मना कर देता है।
उस दौरान फाउंडर:
- कहीं और raise नहीं कर सकता
- अपना business भी ठीक से नहीं चला सकता
- runway खत्म होती जाती है
और सबसे बड़ी बात — term sheet legally binding नहीं होती। VC का कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता। अमेरिका में ऐसा करने पर एक Twitter post से उस fund का नाम बर्बाद हो जाए। भारत में? कोई accountability नहीं।

वो Clauses जो आपकी कंपनी छीन सकते हैं
1. Liquidation Preference — सबसे खतरनाक clause
यह clause 1X, 2X या 3X में आता है। सरल भाषा में समझें:
मान लीजिए एक VC ने आपकी कंपनी में ₹100 करोड़ लगाए और 3X liquidation preference ली। आपने कंपनी ₹400 करोड़ में बेची। पहले ₹300 करोड़ VC के, बाकी बचे ₹100 करोड़ में आपकी हिस्सेदारी।
एक real case — एक फाउंडर ने अपनी कंपनी ₹400 करोड़ में बेची और उसे मिला शून्य। सिर्फ इसलिए क्योंकि उसने 3X liquidation preference sign की थी और उसे इसका मतलब ठीक से नहीं पता था।
सीख: 1X से ज़्यादा liquidation preference कभी sign न करें।
2. Personal FD Clause
एक फाउंडर को ₹2 करोड़ देने के बदले एक VC ने मांगा — ₹50 लाख की personal FD अपने नाम पर।
यानी अगर कंपनी डूबी तो वो FD VC की। यह term sheet में लिखा हुआ था। यह legal भी है — इसीलिए और भी खतरनाक है।
3. Tranche-based Investment का जाल
VC बोलता है — “पहले ₹2 करोड़ देते हैं, बाकी ₹8 करोड़ बाद में।”
एक real example: एक deep tech company जो सिर्फ ₹110 में blood test करने की machine बना रही थी — rural India के लिए क्रांतिकारी product। VC ने पहली किश्त दी, दूसरी रोक ली। कंपनी मर गई। वो फाउंडर आज दोबारा startup नहीं करना चाहता।
सीख: Tranche-based investment से जितना हो सके बचें। पूरा पैसा एक साथ negotiate करें।
4. Facilitation Fee का घोटाला
एक फाउंडर ₹1 करोड़ raise कर रहा था। VC ने मांगे:
- ₹4 लाख — अपनी fee
- ₹6 लाख — अपने lawyer को
- 2% advisory equity अलग से
यानी ₹10-15 लाख तो खर्च हो गए — ₹1 करोड़ मिलने से पहले ही। यह 10-15% निकल गया सीधे।
Founder का Control कैसे जाता है?
Board में अगर VC के ज़्यादा members हैं, तो वो “non-performance” का आरोप लगाकर फाउंडर को ही बाहर कर सकते हैं।
कौन decide करता है कि performance हुई या नहीं? वही board।
इसीलिए हमेशा यह सुनिश्चित करें:
- Board में आपका majority या equal control हो
- “Non-performance” की definition clearly लिखी हो
- Removal process में आपकी consent ज़रूरी हो
Runway कैसे Manage करें?
सही formula
Runway = Bank में बचा पैसा ÷ पिछले 3 महीने का average burn
Common गलतियाँ
- सिर्फ monthly burn देखना, working capital ignore करना
- 3 महीने बचे हैं तब fundraising शुरू करना — यह सबसे बड़ी गलती है
सही approach
| Runway बचा है | क्या करें |
|---|---|
| 18-24 महीने | ideal, focus on growth |
| 12 महीने | fundraising planning शुरू करें |
| 6 महीने | तुरंत market में जाएं |
| 3 महीने से कम | danger zone |
भारत में एक round close होने में कम से कम 4-5 महीने लगते हैं। इसलिए 6 महीने से पहले ही fundraising शुरू करें।
Venture Debt — कब लें, कब नहीं?
Venture debt एक attractive product है — VC को मिलता है:
- 14% interest
- Free equity भी
लेकिन फाउंडर के लिए यह तभी सही है जब:
✅ Business cash flow positive हो
✅ Debt service कर सकते हों अपने revenues से
❌ अगर equity funding बंद हो जाए तो debt service नहीं कर पाएंगे — कंपनी debt provider की हो जाएगी।
GoodGlam Group का उदाहरण — Sirona Health को debt providers ने ले लिया क्योंकि कंपनी cash flow generate नहीं कर पा रही थी।
भारत में Capital Raise करना इतना मुश्किल क्यों है?
1. पैसा ही नहीं है
भारत के VC funding का 70% अमेरिका से आता है। Indian corporates, family offices — कोई भी startups में invest नहीं करता। उनका जवाब होता है — “बहुत risky है।”
लेकिन अगर risk नहीं लेंगे तो innovation कैसे आएगा?
2. Government की रफ्तार
RDI Scheme में ₹1 लाख करोड़ का वादा हुआ। एक साल में deploy हुए सिर्फ ₹2000 करोड़ — और वो भी ज़्यादातर उन्हीं को मिले जिनकी committee में जान-पहचान थी।
जब technology इतनी तेज़ी से बदल रही है, तो 2-3 साल में grant देना — तब तक वो technology पुरानी हो चुकी होगी।
3. MCA की website
एक फाउंडर का round बस इसलिए delay होता है क्योंकि MCA की website काम नहीं कर रही। Documents upload नहीं होते, filing pending रहती है, पैसा नहीं आता। हज़ारों startups का यही हाल है।
4. Software के पैसे कोई नहीं देता
FreshWorks India में बना। India में किसी ने नहीं खरीदा। US गया, वहाँ बिका, वहाँ बड़ा हुआ। आज Indians भी ChatGPT और Claude के लिए पैसे देते हैं — लेकिन Indian software के लिए नहीं।
क्या India कभी अपना OpenAI बना सकता है?
आज की तारीख में — नहीं।
इसके लिए तीन चीज़ें एक साथ होनी चाहिए:
- Corporates का investment — manufacturing companies अपने profits का कम से कम 25% R&D में लगाएं, जैसे China करता है
- Government की तेज़ और transparent funding — बिना nepotism के, समय पर
- VC ecosystem का founder-friendly होना — कम clauses, जल्दी पैसा, कम legal drama
जब तक यह तीनों नहीं होंगे — भारत के talented founders Silicon Valley जाते रहेंगे और वहाँ के लिए build करते रहेंगे।
अगर आप Founder हैं तो याद रखें
“पैसे के लिए business मत बनाओ। जिस दिन down turn आएगा, पैसों के लिए करने वाला या तो कंपनी बेच देगा या job ले लेगा।”
सबसे ज़रूरी बातें:
- Passion से बनाओ — market insight के साथ
- Clauses समझो — खासकर liquidation preference और control clauses
- Runway manage करो — 6 महीने पहले fundraising शुरू करो
- ESOPs दो — बिना इसके अच्छी team नहीं बनेगी
- सही VC चुनो — जो पैसा जल्दी दे, clauses कम हों, founder-friendly हो
और सबसे ज़रूरी — 200 rejections के बाद भी चलते रहो। एक “हाँ” पूरी ज़िंदगी बदल सकती है।