बायो फ्लॉक मछली पालन { Biofloc Fish Farming}| लागत, सब्सिडी और पूरी प्रक्रिया

बायो-फ्लॉक मत्स्य पालन: कम जगह में अधिक मुनाफे की आधुनिक तकनीक

मछली पालन की परंपरागत विधियाँ अक्सर बड़े तालाबों और अधिक जगह की मांग करती हैं। लेकिन आज एक ऐसी आधुनिक तकनीक उपलब्ध है जो कम जगह में भी बड़े पैमाने पर मत्स्य पालन और अच्छी आय की संभावना प्रदान करती है—इसका नाम है बायो-फ्लॉक मत्स्य पालन

बिहार के वैशाली ज़िले के दयालपुर गाँव में पंकज कुमार तिवारी पिछले 5 वर्षों से इसी तकनीक से सफलतापूर्वक मछली पालन कर रहे हैं। कंप्यूटर साइंस में मास्टर्स और सॉफ्टवेयर इंजीनियर के पेशे से जुड़े पंकज ने लॉकडाउन के दौरान गाँव लौटकर इस व्यवसाय की शुरुआत की और आज उनके पास 60-70 टैंक हैं।

बायो-फ्लॉक तकनीक क्या है?

बायो-फ्लॉक मत्स्य पालन इजराइल में विकसित एक उन्नत तकनीक है, जिसमें टैंकों के अंदर सघन घनत्व में मछली पाली जाती है। इस तकनीक का मुख्य आधार लाभदायक जीवाणुओं (बैक्टीरिया) का समूह (फ्लॉक) है, जो मछली के अपशिष्ट और अतिरिक्त फीड को प्रोटीन युक्त जीवित आहार में बदल देता है। इससे पानी की गुणवत्ता बनी रहती है और मछली को अतिरिक्त पोषण भी मिलता है।

मुख्य लाभ:

  • कम स्थान में उच्च उत्पादन: पारंपरिक तालाब के मुकाबले बहुत कम जगह में अधिक मछली उत्पादन संभव है।
  • पानी की बचत: इस प्रणाली में पानी की आवश्यकता बहुत कम होती है, क्योंकि इसे बार-बार बदलने की ज़रूरत नहीं पड़ती।
  • कम रोग संभावना: नियंत्रित वातावरण में रहने से मछलियों में रोगों का खतरा कम हो जाता है।
  • विविध प्रजातियों का पालन: एक ही सिस्टम में विभिन्न प्रकार की मछलियाँ पाली जा सकती हैं।

किन मछलियों का पालन संभव है?

बायो-फ्लॉक प्रणाली में निम्नलिखित प्रजातियों का सफलतापूर्वक पालन किया जा सकता है:

  • सिंघी (कैटफिश)
  • रूपचंदा
  • कॉमन कार्प
  • पंगास
  • मृगल
  • देशी मांगुर
  • टेंगरा

बुनियादी संरचना और लागत

टैंक: आमतौर पर 4 मीटर व्यास और 1.2 मीटर गहरे टैंक (लगभग 10,000 लीटर क्षमता) का उपयोग किया जाता है। टैंक पोर्टेबल तारपोलिन (1000-1100 जीएसएम पीवीसी कोटेड) से बनाए जाते हैं, जिनकी उम्र 10-11 वर्ष तक होती है।

अन्य आवश्यक उपकरण:

  • पानी को ऑक्सीजन युक्त रखने के लिए एरेटर मशीन।
  • पानी निकासी के लिए केंद्र में ड्रेनेज सिस्टम, ताकि गंदगी (स्लज) आसानी से बाहर निकल सके।
  • टैंक को छाया देने और बारिश से बचाने के लिए बांस व तिरपाल की शेड।

लागत (अनुमानित):

  • एक टैंक की कुल लागत: तारपोलिन, बेस, पाइप आदि सहित लगभग ₹25,000 – ₹30,000
  • एरेटर मशीन: लगभग ₹35,000 – ₹40,000 (एक मशीन कई टैंक के लिए काम कर सकती है)।
  • सात टैंक का प्रारंभिक सेटअप: टैंक, मशीन, शेड और अन्य खर्च मिलाकर लगभग ₹2.5 से ₹3 लाख।

उत्पादन और आय

  • स्टॉकिंग: एक टैंक में लगभग 400-500 मछलियों के बीज (100-150 ग्राम/किलो वाले) डाले जा सकते हैं।
  • उत्पादन: लगभग 5-6 महीनों में मछलियाँ 400-500 ग्राम के आकार तक पहुँच जाती हैं। एक टैंक से प्रति चक्र लगभग 200 किलो मछली का उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है।
  • आय: प्रजाति के अनुसार थोक भाव ₹70 से ₹150 प्रति किलो तक मिलता है। एक टैंक से प्रति चक्र लगभग ₹15,000 – ₹30,000 का शुद्ध लाभ संभव है।
  • वार्षिक आय: सात टैंक से साल में दो चक्र पूरे करके ₹2 से ₹3 लाख तक की शुद्ध आय अर्जित की जा सकती है। दस टैंक से यह आय और अधिक हो सकती है।

सरकारी अनुदान (सब्सिडी) और ऋण

भारत सरकार की प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत बायो-फ्लॉक इकाई स्थापित करने हेतु अनुदान दिया जाता है।

अनुदान राशि (लगभग):

  • 7 टैंक: कुल लागत का 40% (महिलाओं के नाम पर 45%, पुरुषों के नाम पर 40%)
  • 25 टैंक: कुल लागत का 40% (महिलाओं के नाम पर 15 लाख, पुरुषों के नाम पर 10 लाख तक)
  • 50 टैंक: कुल लागत का 40% (महिलाओं के नाम पर 20 लाख, पुरुषों के नाम पर 15 लाख तक)

आवेदन प्रक्रिया:

  1. अपने राज्य के मत्स्य पालन विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर जाएँ।
  2. स्वयं को पंजीकृत करें (आधार कार्ड, जमीन के कागज़ात, बैंक खाता विवरण आदि की आवश्यकता होगी)।
  3. ‘बायो-फ्लॉक’ विकल्प चुनकर ऑनलाइन आवेदन पत्र भरें और आवश्यक दस्तावेज अपलोड करें।
  4. चयन होने के बाद अधिकारी मुआयना करते हैं और अनुदान स्वीकृत होता है।

एक महत्वपूर्ण चेतावनी: कुछ किसान केवल अनुदान प्राप्त करने के लिए इकाई लगाते हैं और वास्तविक पालन नहीं करते। इससे तकनीक के प्रति गलत धारणा बनती है। ईमानदारी से व्यवसाय करना ही दीर्घकालिक सफलता का मार्ग है।

नए किसानों के लिए सलाह

  1. शुरुआत: कम से कम 7 टैंक से प्रारंभ करें। इससे लागत नियंत्रित रहेगी और अनुदान के योग्य भी बने रहेंगे।
  2. प्रशिक्षण: शुरू करने से पहले किसी प्रशिक्षण केंद्र से उचित मार्गदर्शन अवश्य लें।
  3. बीज (सीड) की गुणवत्ता: विश्वसनीय स्रोत से ही स्वस्थ व उचित आकार के बीज खरीदें। धोखाधड़ी से बचने के लिए किसी अनुभवी किसान की सलाह लें।
  4. जल प्रबंधन: पानी के पीएच, ऑक्सीजन स्तर और तापमान पर नियमित निगरानी रखें। ठंड में तापमान बनाए रखने के लिए आवश्यकता पड़ने पर जल परिवर्तन या हीटर का उपयोग करें।

निष्कर्ष

बायो-फ्लॉक मत्स्य पालन कृषि का एक लाभकारी और आधुनिक स्वरूप है। यह उन युवाओं और किसानों के लिए एक बेहतर विकल्प हो सकता है जिनके पास सीमित ज़मीन है, लेकिन एक स्थिर और लाभदायक व्यवसाय शुरू करने की इच्छा है। उचित योजना, तकनीकी ज्ञान और लगन से यह व्यवसाय न केवल आत्मनिर्भरता का मार्ग प्रशस्त करेगा, बल्कि देश की मत्स्य उत्पादन में भी महत्वपूर्ण योगदान देगा।

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