फुटवियर बिजनेस का Ideas संपूर्ण गाइड | नरेला इंडस्ट्रियल एरिया

नमस्कार दोस्तों! स्वागत है आपका एक नए और जानकारी से भरपूर आर्टिकल में।

आज हम हैं दिल्ली के नरेला इंडस्ट्रियल एरिया में, जो कि फुटवेयर उद्योग का एक प्रमुख केंद्र है। यहाँ आपको बड़ी संख्या में फुटवेयर कंपनियाँ मिल जाएंगी। हम अभी XMX ग्रुप की फैक्ट्री और उनके हाल ही में खुले शोरूम में आए हैं। हम आपको फैक्ट्री का विजिट कराएंगे, यह समझाएंगे कि उत्पाद कैसे बनते हैं, और आप फैक्ट्री से सीधे जुड़कर कैसे व्यवसाय कर सकते हैं।

तो चलिए, सबसे पहले मिलते हैं कंपनी के एमडी साहब से और उनके इस नए सैंपल रूम के बारे में जानते हैं।

सैंपल रूम: एक गेम-चेंजर अवधारणा

नमस्कार सर! आपने यहाँ एक बहुत ही आकर्षक सैंपल रूम बनाया है। इसको शुरू करने का मुख्य उद्देश्य क्या रहा?

एमडी साहब: धन्यवाद। दरअसल, पिछले चार सालों में फुटवेयर व्यवसाय में मेरी एक ही स्टडी रही है। जब भी कोई ग्राहक (पार्टी) आता था, हमें एक-दो बैग खोलकर सैंपल दिखाने पड़ते थे। हम सभी सैंपल सही तरीके से प्रस्तुत नहीं कर पाते थे। मेरे मन में था कि एक ऐसा सैंपल रूम हो, जहाँ आर्टिकल ढूंढने की ज़रूरत न पड़े। हमारी 7-8 फैक्ट्रियाँ हैं, हर बार स्टाफ को यह आर्टिकल लाओ, वह आर्टिकल लाओ कहना… इससे ग्राहक भी परेशान होता था और हमारी मैनेजमेंट क्षमता पर भी सवाल उठता था।

अपने व्यापार को बूस्ट देने के लिए हमने यह सैंपल रूम बनाया है। हमने इसे आर्टिकल वाइज और श्रेणी के हिसाब से व्यवस्थित किया है – जैसे PVC की रेंज अलग, EVA की अलग, फैब्रिकेशन की अलग। अब अगर कोई ग्राहक सिर्फ फैब्रिकेशन में दिलचस्पी रखता है, तो वह सीधे उस सेक्शन में जाकर चुन सकता है। इससे उसका निर्णय लेना आसान हो जाता है और हमें भी उसकी सेवा करने में सुविधा होती है।

पहले एक ग्राहक को समझाने में 3-4 घंटे लग जाते थे, अब वही काम डेढ़ घंटे में हो जाता है। ग्राहक भी खुश और हम भी उसका सम्मान कर पाते हैं। औसतन रोज़ 5-7 ग्राहक आते हैं, अब हम उन्हें पूरा समय और सही जानकारी दे पाते हैं।

फैक्ट्री से सीधा जुड़ाव: नीति और भविष्य

एक सवाल जो अक्सर हमारे व्यूवर्स का रहता है – क्या कोई छोटा व्यापारी फैक्ट्री से सीधा जुड़कर काम कर सकता है? ताकि उसे बेहतर दाम मिल सके।

एमडी साहब: मैं इस बात के लिए माफी चाहता हूँ, लेकिन फिलहाल हमारा फोकस पूरी तरह B2B (Business-to-Business) पर है। हम होलसेलर्स और मिनी होलसेलर्स के साथ काम करते हैं, जिनकी ऑर्डर मात्रा कम से कम 50 कार्टन होती है। ऐसा इसलिए क्योंकि हम उन राज्यों के मौजूदा डीलर्स को डिस्टर्ब नहीं करना चाहते, जहाँ पहले से हमारे पार्टनर काम कर रहे हैं।

दूसरा, इतनी बड़ी वैरायटी (लगभग 800-900 आर्टिकल) में से 5-10 कार्टन के ऑर्डर को मैनेज करना हमारे सिस्टम के लिए अभी चुनौतीपूर्ण है। हाँ, भविष्य में हम इस पर ज़रूर विचार करेंगे। इसके लिए हमें एक मजबूत सिस्टम बनाने की ज़रूरत है, जिसमें थोड़ा समय लगेगा।

सैंपल रूम का दौरा: असीम वैरायटी

दोस्तों, यहाँ आपको फुटवेयर की एक शानदार रेंज देखने को मिलेगी। चूंकि यह मुख्यतः होलसेल बिजनेस के लिए है, इसलिए यदि आप व्यवसाय शुरू करना चाहते हैं, तो यहाँ से जुड़ सकते हैं। ऑर्डर की न्यूनतम मात्रा 50 कार्टन है।

सर, इतने सारे आर्टिकल में से कुछ खास आर्टिकल हमें दिखाइए।

एमडी साहब: फुटवेयर लाइन की जननी, यानी सबसे बेसिक रेंज को हवाई कहते हैं। हमारे पास इसकी शायद सबसे बड़ी रेंज है। हम लेडीज के लिए तीन अलग-अलग प्राइस पॉइंट (जैसे ₹60, ₹70, ₹80) पर अलग-अलग क्वालिटी के आर्टिकल बनाते हैं, ताकि हर ग्राहक की ज़रूरत पूरी हो सके। ये सारे हवाई के ही आर्टिकल हैं।

एक दिलचस्प बात बताऊँ? कहते हैं न कि हलवाई अपनी मिठाई नहीं खाता। पर मैं खुद एक्समैक्स के आर्टिकल पहनता हूँ! इससे दो फायदे होते हैं: पहला, मुझे खुद अपने प्रोडक्ट की क्वालिटी का अंदाजा रहता है कि मैं कहाँ स्ट्रांग हूँ और कहाँ सुधार की ज़रूरत है। दूसरा, मेरे दोस्त और परिचित सीधा फीडबैक दे देते हैं।

देखिए ये EVA के आर्टिकल। इसका नाम है ओलंपिक। आज के दिन भी इसकी 10-11 डिज़ाइन चल रही हैं। ये पैडेड आर्टिकल हैं, जो बुजुर्ग, युवा सभी के लिए आरामदायक और टिकाऊ हैं।

फैक्ट्री विजिट: देखिए कैसे बनता है फुटवेयर

अब चलते हैं फैक्ट्री के अंदर, जहाँ ये सारे आर्टिकल जन्म लेते हैं।

  1. शीट बनाना (हवाई शीट प्लांट): यहाँ EVA, रबर और केमिकल्स को मिक्स किया जाता है। फिर इसे रंग के अनुसार तैयार कर एक रोल पर चढ़ाया जाता है। इस रोल की मोटी शीट को बारीक लेयर में परिवर्तित किया जाता है, ताकि कंपाउंड में कोई खराबी न रहे। फिर इसकी कटिंग होती है।
  2. लेयर तैयार करना: अब इस शीट को डाई के वजन के हिसाब से काटा जाता है। अक्सर हवाई चप्पल की तीन लेयर (जैसे लाल, सफेद, नीचे नीली) बनती हैं। इन लेयरों को प्रेस में डाला जाता है, जहाँ वे एक निश्चित साइज़ और कलर इंटेंसिटी के साथ बाहर आती हैं।
  3. इन-हाउस प्रोडक्शन: यहाँ रबर सोल (स्टैप) बनते हैं। मोल्ड में कलर भरकर, उसे प्रेस में डाला जाता है और उसी डिज़ाइन की सोल तैयार हो जाती है।
  4. कटिंग एवं असेंबली: शीट से पैर के आकार (लेफ्ट-राइट) काटे जाते हैं। फिर उन पर साइड प्रिंटिंग की जाती है। प्रिंटिंग के बाद, आर्टिकल को हीटर वाली कन्वेयर बेल्ट से गुज़ारा जाता है ताकि प्रिंट सूख जाए।
  5. एम्बॉसिंग और फिनिशिंग: यहाँ चाइनीज़ एम्बॉसिंग मशीन से आर्टिकल को डिज़ाइन और टेक्सचर दिया जाता है। इसके बाद बफिंग (पॉलिश) का काम होता है। फिर आर्टिकल को साफ़ करके सुखाया जाता है।
  6. पासिंग एवं क्वालिटी चेक: यहाँ लेफ्ट-राइट जोड़े बनाए जाते हैं और साइज़ के अनुसार अलग किया जाता है। दोबारा शाइनिंग की जाती है और आखिरी बार क्वालिटी चेक होता है।
  7. पैकिंग: आर्टिकल पर ब्रांड टैग लगाए जाते हैं। फिर उन्हें बटर पेपर में लपेटकर सावधानी से पैक किया जाता है। एक्समैक्स की खास बात यह है कि हम एक कार्टन में तीन अलग-अलग कलर और पूरे साइज़ रेंज पैक करते हैं, जबकि पहले इंडस्ट्री में एक कार्टन में एक ही कलर होता था।

निष्कर्ष

दोस्तों, हमने देखा कि एक आकर्षक चप्पल या स्लीपर बनाने के पीछे कितनी बारीक प्रक्रिया और मेहनत छुपी होती है। XMX ग्रुप ने अपने सैंपल रूम और इन-हाउस प्रोडक्शन से ग्राहकों और अपने डीलर नेटवर्क दोनों के लिए काम आसान बना दिया है।

यदि आप फुटवेयर का होलसेल व्यवसाय शुरू करना चाहते हैं और कम से कम 50 कार्टन का ऑर्डर दे सकते हैं, तो आप XMX ग्रुप से सीधे जुड़ सकते हैं। आप डिस्क्रिप्शन में दिए गए नंबर या सोशल मीडिया हैंडल्स के ज़रिए कंपनी से संपर्क कर सकते हैं।

एमडी साहब का अंतिम संदेश: “फिलहाल हम B2C में नहीं हैं, लेकिन भविष्य में ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के ज़रिए ज़रूर आएंगे, क्योंकि आज के दौर में ऑनलाइन के बिना कोई काम नहीं चलता।”

उम्मीद है यह आर्टिकल और फैक्ट्री टूर आपको पसंद आया होगा। व्यवसाय से जुड़े किसी भी सवाल के लिए कमेंट करें।

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