कार्ट बिजनेस का डर दूर करें: 3 जगहों पर आसानी से लगाएं ठेला + पुलिस/निगम से बचने के जबरदस्त टिप्स!

कार्ट बिजनेस शुरू करने का डर दूर करें: पूरी गाइड (Overcoming Fear to Start a Street Food Cart Business)

कई भाइयों के मन में ये डर रहता है:

  • “पुलिस परेशान करेगी!”
  • “पहले से मौजूद दुकानदार/बिजनेस वाले झगड़ा करेंगे!”
  • “नगर निगम वाले कार्ड उठा ले जाएंगे, पैसा डूब जाएगा!”
  • “कम बजट में शुरुआत कर रहा हूं, कहीं प्रॉब्लम में न फंस जाऊं…”

यह आर्टिकल खास तौर पर उन भाइयों के लिए है जो:

  1. कम बजट में स्ट्रीट फूड कार्ट बिजनेस शुरू करना चाहते हैं।
  2. मन में हल्का सा डर या कन्फ्यूजन है।
  3. जानना चाहते हैं कि लोकेशन कैसे ढूंढें, परमिशन कैसे लें और दिक्कतों से कैसे निपटें।

डर को दूर भगाएं: वास्तविकता जानिए

  • सच्चाई: 10 में से 7-8 लोग आपकी मेहनत की कद्र करेंगे, हेल्प करेंगे। सिर्फ 2-3 नकारात्मक लोग हर जगह होते हैं।
  • पुलिस कब परेशान करती है? सिर्फ तब जब कोई शिकायत करे (जैसे गलत जगह लगाना, शोरगुल, बदतमीजी)। अगर आपके पास परमिशन है और आप सही तरीके से काम करते हैं, तो डरने की जरूरत नहीं।
  • मार्केट वाले/बड़े बिजनेसमैन: ज्यादातर नए कार्ट का स्वागत करते हैं क्योंकि इससे फुटफॉल बढ़ता है। कुछ ईर्ष्या कर सकते हैं, लेकिन अच्छे लोग उनका मुकाबला करने में आपकी मदद करेंगे।
  • नगर निगम: अगर आप उनकी प्रॉपर्टी पर कार्ड लगा रहे हैं, तो परमिशन जरूरी है। लेकिन अगर परमिशन नहीं मिल रही या “होल्ड” है, तो भी विकल्प मौजूद हैं (नीचे देखें)।

कार्ट लगाने की जगह (लोकेशन) के 3 मुख्य विकल्प:

  1. सरकारी जमीन (नगर निगम की प्रॉपर्टी):
    • कैसे: नगर निगम कार्यालय जाएं, परमिशन स्लिप/पर्ची लें।
    • खर्च: शहर के हिसाब से अलग, आमतौर पर ₹300 से ₹700 प्रति माह।
    • फायदा: सस्ता।
    • नुकसान: परमिशन मिलने में दिक्कत, किसी की शिकायत पर हटाने का खतरा, रोजाना कार्ड लगाने-हटाने की झंझट।
  2. प्राइवेट प्लॉट (किसी व्यक्ति की जमीन):
    • कैसे: मार्केट में उन जगहों को ढूंढें जहां पहले से कार्ट लगे हैं। कार्ट वालों या आसपास के लोगों से पूछकर प्लॉट मालिक का पता करें। सीधे मालिक से बात करें, रेंट तय करें, लिखित समझौता करें।
    • खर्च: लोकेशन के हिसाब से अलग (उदाहरण: ₹6000 – ₹8000+ प्रति माह)।
    • फायदा: ज्यादा सुरक्षित, परमिशन की जरूरत नहीं, पुलिस/निगम से परेशानी कम। मालिक आपकी परेशानी सुलझाने में मदद कर सकता है।
    • जरूरी बात: प्लॉट मालिक से साफ कहें कि वह आपके जैसा ही प्रोडक्ट बेचने वाला दूसरा कार्ट उसी प्लॉट पर न लगाए।
  3. दुकान के बाहर की जगह:
    • कैसे: ऐसी दुकानें ढूंढें जो आपके प्रोडक्ट से रिलेटेड न हों (जैसे: आप साउथ इंडियन बेचें, तो बेकरी, किराना, मनिहारी की दुकान)। दुकानदार से बात करें। प्रस्ताव दें: “मैं आपकी दुकान के बाहर अपना छोटा कार्ट लगाना चाहता हूं। बिजली का कनेक्शन आपका इस्तेमाल करूंगा, मीटर रीडिंग के हिसाब से बिल भर दूंगा और आप जो मंथली रेंट चाहें, वो भी दूंगा।”
    • फायदा: दुकानदार को एक्स्ट्रा इनकम और बढ़ा हुआ फुटफॉल मिलता है। इसलिए 10 में से 7 दुकानदार हां कह देते हैं। आपको बिजली और लोकेशन मिल जाती है।
    • खर्च: रेंट + बिजली का बिल।

लोकेशन चुनते समय याद रखें ये सुनहरे नियम:

  • फुटफॉल सबसे ज्यादा जरूरी: थोड़ा ज्यादा रेंट देना पड़े, तो भी ऐसी जगह चुनें जहां भीड़ ज्यादा हो। खराब लोकेशन पर कम रेंट देकर भी आप नुकसान में रहेंगे।
  • कंपटीशन से न डरें: अच्छी लोकेशन पर कंपटीशन होगा ही। फोकस अपने प्रोडक्ट की क्वालिटी और टेस्ट पर रखें। कस्टमर खुद आपके पास आएंगे।
  • रिसर्च जरूर करें: मार्केट में घूमें। दूसरे कार्ट वालों से बात करें (धीरे-धीरे, उनका सामान खाकर)। पूछें: रेंट कितना है? परमिशन कैसे ली? ये कार्ड कहाँ से बना? नगर निगम ऑफिस कहाँ है?
  • खाली प्लॉट का फायदा उठाएं: अगर कोई खाली प्लॉट गंदगी से भरा है, तो उसके मालिक का पता लगाएं। ऑफर दें: “मैं केयरटेकर बन जाता हूं, प्लॉट साफ रखूंगा। मैं यहां अपना कार्ड लगाऊंगा और आपको रेंट दूंगा। साथ ही, मैं और कार्ट लगवाकर उनसे भी रेंट इकट्ठा करके आपको दूंगा।”

नगर निगम से परमिशन न मिले तो क्या करें?

  • घबराएं नहीं! विकल्प 2 और 3 (प्राइवेट प्लॉट या दुकान के बाहर) का इस्तेमाल करें। ये पूरी तरह लीगल और सुरक्षित तरीके हैं।

कार्ट बिजनेस के फायदे:

  • कम इन्वेस्टमेंट: कैफे/रेस्टोरेंट के मुकाबले बहुत कम पैसा लगता है।
  • अच्छी कमाई: सही लोकेशन और क्वालिटी पर अच्छा प्रॉफिट हो सकता है (शाम के 3-4 घंटे में भी ₹10,000-₹12,000 रोज की सेल संभव)।
  • लोकेशन बदलने में आसानी: अगर कोई जगह ठीक न लगे या प्रॉब्लम हो, तो कार्ट को दूसरी जगह शिफ्ट करना आसान है।
  • बड़े स्तर की पहली सीढ़ी: कार्ट से शुरुआत करके आगे चलकर मल्टीपल कार्ट या फिर रेस्टोरेंट/कैफे खोल सकते हैं।

अंतिम और सबसे जरूरी सलाह: एक्शन लें!

  • डर पर जीत ही सफलता है: डर (शर्म, असफलता का डर) तभी खत्म होगा जब आप कार्ट लगाकर सामने आएंगे। 100 मोटिवेशनल वीडियो देखने से डर नहीं जाएगा।
  • फाइनल डिसीजन लें: अगर बिजनेस करना है, तो कार्ट ही खोलना है, ये फैसला कर लें।
  • थोड़ा पैसा लगा दें: कार्ड बनवा लें, बर्तन खरीद लें। घर पर पड़ा कार्ड आपको रोज याद दिलाएगा कि आपको कुछ करना है। ये मोटिवेशन से ज्यादा कारगर है।
  • नुकसान से न डरें: अगर नुकसान भी होता है, तो अनुभव मिलेगा। प्रॉफिट होगा तो पैसा मिलेगा। दोनों ही आपको आगे बढ़ाएंगे।
  • आगे का लक्ष्य बनाए रखें: सोचें कि ये कार्ट सिर्फ पहला कदम है। आगे दूसरा कार्ट लगाना है या रेस्टोरेंट खोलना है। इससे आप छोटी-मोटी झगड़ों या नकारात्मक लोगों पर ध्यान नहीं देंगे।
  • शांत और विनम्र रहें: मार्केट में किसी से झगड़ा न करें। अगर कोई ज्यादा परेशान करे, तो लोकेशन बदल लें। आपका फोकस बिजनेस बढ़ाने पर होना चाहिए।

निष्कर्ष:
कार्ट बिजनेस कम बजट में शुरू करने और अच्छा पैसा कमाने का बेहतरीन जरिया है। डर वास्तविक है, लेकिन असली नहीं। सही लोकेशन का चुनाव करें, दूसरे कार्ट वालों से बात करके सीखें, परमिशन या प्राइवेट डील ठीक से करें, अपने प्रोडक्ट की क्वालिटी पर ध्यान दें और सबसे बढ़कर – कार्ट लगाकर काम शुरू कर दें! पहला कदम उठाते ही आधा डर खुद-ब-खुद गायब हो जाएगा।

जय हिन्द, जय भारत!

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